उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manzil nahin safar mein junun-e-safar mile

मंज़िल नहीं सफ़र में जुनून-ए-सफ़र मिले

منزل نہیں سفر میں جنون سفر ملے

शायर: Faheem Jogapuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंज़िल नहीं सफ़र में जुनून-ए-सफ़र मिले
ना-मो'तबर ख़ुशी है ग़म-ए-मो'तबर मिले

हम ने तो यूँ किसी पे भरोसा नहीं किया
फिर भी कोई मिला तो बहुत टूट कर मिले

दुनिया में इश्क़ ही से मिली दौलत-ए-हयात
और इश्क़ ही से फ़ित्ना-ए-शाम-ओ-सहर मिले

बचपन शबाब और ज़ईफ़ी के तीन पल
लम्हे जो ज़िंदगी को मिले मुख़्तसर मिले

उस आदमी को क़िस्सा-ए-रंग-ए-हिना से क्या
जो अपने ख़ूँ में डूबा हुआ सर-बसर मिले

ये दिल की आरज़ू है कि मेरी जबीन-ए-शौक़
ख़ूँ से वुज़ू करे जो तिरा संग-ए-दर मिले

हर पल है ज़िंदगी से परेशान आदमी
फिर भी ये आरज़ू है कि बार-ए-दिगर मिले

पेश-ए-ख़ता ये सोचना ऐसा न हो कहीं
इक लम्हे की ख़ता की सज़ा उम्र भर मिले

तूफ़ान-ए-बहर से कोई शिकवा नहीं 'फहीम'
हम को तो अपनी नाव के अंदर भँवर मिले