उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mandiron ki suno ishq ghanshyam hai

मंदिरों की सुनो इश्क़ घनश्याम है

مندروں کی سنو عشق گھنشیام ہے

शायर: Tahreem Amanullah Bukhari4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंदिरों की सुनो इश्क़ घनश्याम है
देव-दासी की आँखों में इक राम है

हादिम-ए-वक़्त जब फावड़ा सूंत ले
उस को फिर क्या ख़बर सब्ज़ है चाम है

मैं ने सुब्हों की आमद पे नज़्में कहीं
और चीख़ें सुनीं शाम है शाम है

साँवरी से कहो चूड़ियाँ तोड़ ले
ख़्वाब है क़ाम है और फिर साम है