उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main musafir saba ki rahon ka

मैं मुसाफ़िर सबा की राहों का

میں مسافر صبا کی راہوں کا

शायर: Qaisar Shameem9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं मुसाफ़िर सबा की राहों का
बोझ उठाए हुए गुनाहों का

रूह का ज़ख़्म एक तीखी याद
नक़्श भूली हुई निगाहों का

शाम से सुब्ह तक पिघलती रात
सिलसिला बे सदा कराहों का

काले तख़्तों पे सर पटकता दिन
एक मा'मूल दर्स-गाहों का

ज़िंदगी तो शराब-ख़ाने की
नूर चेहरे पे ख़ानक़ाहों का

एक नश्शा हवस की आँखों में
इक तमाशा बरहना बाँहों का

नर्म नर्म उँगलियाँ हवाओं की
खुरदुरा जिस्म शाह-राहों का

तर्ज़-ए-इज़हार का अनोखा-पन
एक अंदाज़ कज-कुलाहों का

मो'तबर शहर शहर में 'क़ैसर'
सच ख़रीदे हुए गवाहों का