उर्दू शायरी · ग़ज़ल

madrase ke azab ne mara

मदरसे के 'अज़ाब ने मारा

مدرسے کے عذاب نے مارا

शायर: Yakta Amrohvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मदरसे के 'अज़ाब ने मारा
टीचरों के 'इताबुन ने मारा

पतली पतली तो याद कर ली थीं
एक मोटी किताब ने मारा

इम्तिहाँ का शबाब अरे तौबा
इम्तिहाँ के शबाब ने मारा

ख़्वाब देखा था पास होने का
उस मुझे झूटे ख़्वाब ने मारा

जितने आसाँ सवाल आए थे
उन के मुश्किल जवाब ने मारा

जिस को डैडी भी पढ़ के पास न हों
इतने मुश्किल निसाब ने मारा

तुम को ज्योमेटरी ने मारा है
मुझ को ज़ालिम हिसाब ने मारा

फ़ेल होने का राज़ फ़ाश किया
हाए चश्म-ए-पुर-आब ने मारा

मैं ने मारा शहाब को इक रोज़
और मुझ को शहाब ने मारा