उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lab pe ek nam jab aata hai to ro lete hain

लब पे इक नाम जब आता है तो रो लेते हैं

لب پہ اک نام جب آتا ہے تو رو لیتے ہیں

शायर: Raees Akhtar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लब पे इक नाम जब आता है तो रो लेते हैं
कोई जी-भर के रुलाता है तो रो लेते हैं

चाँदनी-रात की महकी हुई तन्हाई में
साज़-ए-ग़म पर कोई गाता है तो रो लेते हैं

नूर-ओ-निकहत की फ़ज़ाओं का दिल-आवेज़ समाँ
दिल में जब आग लगाता है तो रो लेते हैं

आज भी हादसा-ए-दर्द-ए-मुहब्बत की क़सम
प्यार जब कोई बढ़ाता है तो रो लेते हैं

आरज़ूओं की उजाड़ी हुई महफ़िल में कहीं
शम-ए-दिल कोई जलाता है तो रो लेते हैं

कोई अंजान मसीहा कोई ग़म का साथी
क़िस्सा-ए-दर्द सुनाता है तो रो लेते हैं

दिल की गलियों से तसव्वुर की हसीं वादी से
जब कोई रूठ के जाता है तो रो लेते हैं

जाने किस ज़ख़्म-ए-मोहब्बत का ख़याल आता है
प्यार से कोई बुलाता है तो रो लेते हैं

अब भी उम्मीद के सोए हुए ज़ख़्मों को 'रईस'
जब कोई आ के जगाता है तो रो लेते हैं