उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya qusur ai arz-e-matlab hasrat-e-pur-josh ka

क्या क़ुसूर ऐ अर्ज़-ए-मतलब हसरत-ए-पुर-जोश का

کیا قصور اے عرض مطلب حسرت پرجوش کا

शायर: Ummeed Amethvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या क़ुसूर ऐ अर्ज़-ए-मतलब हसरत-ए-पुर-जोश का
चश्म-ए-हैराँ का गिला है या लब-ए-ख़ामोश का

हैरत-आबाद-ए-तजल्ली में नहीं उस दिल का काम
सदमा-पर्वर्दा हो जो मेहनत-सरा-ए-होश का

तेग़-ए-क़ातिल मैं तिरे क़ुर्बां बड़ा एहसाँ किया
जिस्म बार इक रूह का था सर वबाल इक दोश का

पा-ए-नाज़ुक को ज़रा दे रुख़्सत-ए-मश्क़-ए-ख़िराम
कब से तकती है क़यामत मुँह तिरी पा-पोश का

हस्ती-ए-हुस्न-ओ-तग़ाफ़ुल-पेशगी का है गवाह
जाँ-ब-लब होना तुम्हारे आशिक़-ए-मदहोश का

कम न होगा शोर-ए-नोशा-नोश-ए-सहबा वाइ'ज़ो
दम सलामत चाहिए उम्मीद-ए-सहबा-नोश का