उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ke sath kiya nisbat hui thi

किसी के साथ किया निस्बत हुई थी

کسی کے ساتھ کیا نسبت ہوئی تھی

शायर: Yasmeen Habeeb6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी के साथ क्या निस्बत हुई थी
मैं अपने-आप से रुख़्सत हुई थी

पलट कर पीछे देखा था ज़रा सा
मुझे ख़ुद पर बड़ी हैरत हुई थी

अचानक आ गई थी अपने आगे
अचानक बात की जुरअत हुई थी

ख़ुद अपना साथ भी चुभने लगा था
अजब तन्हाई की आदत हुई थी

मिरे अंदर भँवर उठने लगे थे
समुंदर से बड़ी वहशत हुई थी

बहुत सरगोशियाँ शीशे से की थीं
किसी की मुझ से भी ग़ीबत हुई थी