उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun ehsas ka alfaz ko de kar sara

ख़ून एहसास का अल्फ़ाज़ को दे कर सारा

خون احساس کا الفاظ کو دے کر سارا

शायर: Qamar Sajjad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ून एहसास का अल्फ़ाज़ को दे कर सारा
सुर्ख़-रू हम ने किया फ़िक्र का मंज़र सारा

एक-दूजे को हसद और अना ले डूबी
आपसी जंग में मारा गया लश्कर सारा

बाहर उस घर की इकाई का भरम भी कब तक
टुकड़े टुकड़े हुआ अंदर से जो कट कर सारा

हम ने जिस आतिश-ए-उल्फ़त से जलाए थे चराग़
दिल हुआ ख़ाक उसी आग में जल कर सारा

दर्द-ओ-ग़म के कई तूफ़ाँ हैं अभी सीने में
क़तरा क़तरा मुझे पीना है समुंदर सारा