उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuda ne kis shahr andar haman ko lae Dala hai

ख़ुदा ने किस शहर अंदर हमन को लाए डाला है

خدا نے کس شہر اندر ہمن کو لائے ڈالا ہے

शायर: Pandit Chandr Bhan Brahman4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदा ने किस शहर अंदर हमन को लाए डाला है
न दिलबर है न साक़ी है न शीशा है न प्याला है

पिया के नाँव की सिमरन किया चाहूँ करूँ किस सीं
न तस्बीह है न सिमरन है न कंठी है न माला है

ख़ुबाँ के बाग़ में रौनक़ हुए तो किस तरह याराँ
न दोना है न मरवा है न सौसन है न लाला है

'बरहमन' वास्ते अश्नान के फिरता है बगियाँ सीं
न गंगा है न जमुना है न नद्दी है न नाला है