उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud ke ehsas-e-mohabbat ne mujhe zinda rakha

ख़ुद के एहसास-ए-मोहब्बत ने मुझे ज़िंदा रखा

خود کے احساس محبت نے مجھے زندہ رکھا

शायर: Urmila Madhav5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद के एहसास-ए-मोहब्बत ने मुझे ज़िंदा रखा
मेरे कुछ नेक ख़यालात ने ताबिंदा रखा

मुझ को मुश्किल ही गुज़रती है शनासाई से
क्यूँकि ऐ दोस्तो तुम ने मुझे शर्मिंदा रखा

सहल-दिल हूँ तो मुझे आप ही चलना है महज़
अपने मेयार को सो ख़ुद से ही पाइंदा रखा

दिल-लगी करती रही ख़ाक-ए-मुहब्बत मुझ से
ज़िंदगी मैं ने तुझे रेत का बाशिंदा रखा

कितने रंगों से मिरी साँस के कस-बल तोले
फिर भी जी भटके नहीं ध्यान ये आइंदा रखा