उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHalish-o-soz dil-figar hi di

ख़लिश-ओ-सोज़ दिल-फ़िगार ही दी

خلش و سوز دل فگار ہی دی

शायर: Habib Tanvir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़लिश-ओ-सोज़ दिल-फ़िगार ही दी
दिल में शमशीर आब-दार ही दी

बेवफ़ा से मुआमले के लिए
इक तबीअत वफ़ा-शिआर ही दी

कैफ़ियत दिल की ब्यान करने को
एक आवाज़ दिल-फ़िगार ही दी

ख़ार को तो ज़बान-ए-गुल बख़्शी
गुल को लेकिन ज़बान-ए-ख़ार ही दी

दिल शब-ए-ज़िंदा-दार हम को दिया
हुस्न को चश्म-ए-पुर-ख़ुमार ही दी

ख़ुद रक़ीबों के वास्ते मैं ने
ज़ुल्फ़ माशूक़ की सँवार ही दी

क्या नशेब-ओ-फ़राज़ थी 'तनवीर'
ज़िंदगी आप ने गुज़ार ही दी