उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kal talak hum the KHunuk chhanw mein palne wale

कल तलक हम थे ख़ुनुक छाँव में पलने वाले

کل تلک ہم تھے خنک چھاؤں میں پلنے والے

शायर: Zafar Ahmad Parwaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कल तलक हम थे ख़ुनुक छाँव में पलने वाले
आज हैं तेज़ कड़ी धूप में जलने वाले

बर्क़ है आतशीं-लावा है कि गुल है क्या है
अपनी तारीफ़ बता आग उगलने वाले

कौन अब तेरे लिए गीत बुनेगा ऐ दोस्त
चंद लम्हों में फ़क़त हम हैं पिघलने वाले

है मुक़द्दर में तिरे सिर्फ़ समंदर का सुकूत
मौज की तरह से गिर गिर के उछलने वाले

आब-ओ-गिल का है ख़मीर अपना मगर ऐ 'पर्वाज़'
हम वो बर्तन नहीं बरसात से गलने वाले