उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi to bais-e-pindar de do

कभी तो बाइ'स-ए-पिंदार दे दो

کبھی تو باعث پندار دے دو

शायर: vatsal rohilla10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी तो बाइ'स-ए-पिंदार दे दो
मुझे इक मौक़ा-ए-दीदार दे दो

हवा को काटना मैं चाहता हूँ
मिरे हाथों में इक तलवार दे दो

सुख़न ज़र ज़बान आते रहेंगे
मुझे हर गोश भी बे-ज़ार दे दो

ज़ियादा मान के ग़लती करूँगा
कभी थोड़ा सा मुझ को प्यार दे दो

ये ख़ामोशी बहुत खुलती है यारो
नहीं हैं गुल तो मुझ को ख़ार दे दो

मुझे नक़्शे समझ आते नहीं हैं
मुझे तस्वीर-ए-कू-ए-यार दे दो

मुझे नक़्शे समझ आते नहीं हैं
मुझे तस्वीर-ए-कू-ए-यार दे दो

बहल जाएगा कुछ पल को मिरा दिल
कोई झूठा सा इक दिलदार दे दो

किसी से दिल लगाना है मुझे बस
कहानी का ही इक किरदार दे दो

बड़ा वीराना है दिल तेरा 'वत्सल'
मकाँ को इस किराया-दार दे दो