उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo samundar hamein ghanghor ghaTa deta hai

जो समुंदर हमें घनघोर घटा देता है

جو سمندر ہمیں گھنگھور گھٹا دیتا ہے

शायर: Ejaz Manpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो समुंदर हमें घनघोर घटा देता है
वही क़तरों को भी दरिया से मिला देता है

जिद्दत-आमोज़ ज़माना हमें क्या देता है
राह की धूल समझता है उड़ा देता है

मुफ़्लिसी कितनी तड़प उठती है बेताबी से
आ के साइल जो कभी दर पे सदा देता है

ज़ब्त का पेड़ घना दिल में लगाए रखना
ये घना पेड़ सदा ठंडी हवा देता है

तह में जाओगे तो मोती भी मिलेंगे तुम को
बुलबुला सारे ख़ज़ाने का पता देता है

चैन से रहता है बुनियाद का पत्थर 'एजाज़'
ज़लज़ला ऊँची इमारत को गिरा देता है