उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jhuTi haqiqaton ki tarah log mar gae

झूटी हक़ीक़तों की तरह लोग मर गए

جھوٹی حقیقتوں کی طرح لوگ مر گئے

शायर: Parkash Fikri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

झूटी हक़ीक़तों की तरह लोग मर गए
लेकिन दिलों पे नक़्श वो तस्वीर कर गए

समझेंगे अपनी 'उम्र का क़िस्सा तमाम है
रंग-ए-ख़िज़ाँ को देख के जिस रोज़ डर गए

सब को जला के राख हुई मौसमों की आग
सब को डुबो के देखिए दरिया उतर गए

चिड़ियों ने जिस पे आस के डेरे जमाए थे
नंगी हैं उस की डालियाँ पत्ते बिखर गए

'फ़िक्री' बरसती शाम सी है दोपहर मगर
निकली ज़रा सी धूप तो चेहरे निखर गए