उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaur-e-be-ja ko jo kahte ho baja hai wo bhi

जौर-ए-बे-जा को जो कहते हो बजा है वो भी

جور بے جا کو جو کہتے ہو بجا ہے وہ بھی

शायर: Ghani Ejaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जौर-ए-बे-जा को जो कहते हो बजा है वो भी
दस्त-ए-क़ातिल पे लहू है कि हिना है वो भी

लोग ख़ुश हैं उसे दे दे के इबादत का फ़रेब
वो मगर ख़ूब समझता है ख़ुदा है वो भी

आज बस आज है क्या ज़िक्र गुज़शता कल का
लाख सोना सही मिट्टी में दबा है वो भी

तुम जिसे जब्र-ओ-सितम क़हर-ओ-ग़ज़ब कहते हो
अपने आ'माल की दर-अस्ल सज़ा है वो भी

चारागर भूल गए हों तो बता दो 'एजाज़'
ज़हर कहते हैं जिसे एक दवा है वो भी