उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jala kar KHud ko teri aankh ka kajal banaunga

जला कर ख़ुद को तेरी आँख का काजल बनाऊँगा

جلا کر خود کو تیری آنکھ کا کاجل بناؤں گا

शायर: Nadeem Naqsh Jewari4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जला कर ख़ुद को तेरी आँख का काजल बनाऊँगा
जो तिश्ना-लब है ये सावन इसे बादल बनाऊँगा

बहुत मग़रूर हो कर फिरती है वो शहर में लड़की
निगाह-ए-नाज़ से अपनी उसे घायल बनाऊँगा

न सोना है न चाँदी है न है कुछ मिलकियत अपनी
दरीदा पैरहन से मैं तिरी पायल बनाऊँगा

बहुत हैरान होगी 'नक़्श' की हालत से ये दुनिया
मैं तेरे इश्क़ में ख़ुद को कभी पागल बनाऊँगा