उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is darja haqiqat-ashna hun

इस दर्जा हक़ीक़त-आश्ना हूँ

اس درجہ حقیقت آشنا ہوں

शायर: Tahseen Sarwari11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस दर्जा हक़ीक़त-आश्ना हूँ
अफ़्साना-तराज़ बन गया हूँ

किस किस ने पढ़ा मगर न समझा
मैं ऐसा ही हर्फ़-ए-मुद्द'आ हूँ

नफ़रत की नज़र से जो न देखे
हैरत से उसे मैं देखता हूँ

मैं सहल-पसंद आदमी हूँ
लिखता वो नहीं जो सोचता हूँ

मैं चश्म-ए-हयात की मिज़ा पर
आँसू की तरह रुका हुआ हूँ

फिरता हूँ चमन चमन मगर मैं
शबनम की मिसाल ठेरता हूँ

बाहर से हूँ एक तूदा-ए-बर्फ़
अन्दर से मगर सुलग रहा हूँ

मेरे न क़रीब से गुज़रना
मैं शाख़-ए-शजर हूँ टूटता हूँ

हर शख़्स को है तलाश मेरी
हर शख़्स को राह में मिला हूँ

कोई तो मुझे मिरी ख़बर दे
मुद्दत से मैं ख़ुद से लापता हूँ

'तहसीन' कहाँ गए हैं सब लोग
मैं राह में क्यूँ खड़ा हुआ हूँ