उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasin KHayal jo paiham unhen satane lage

हसीं ख़याल जो पैहम उन्हें सताने लगे

حسیں خیال جو پیہم انہیں ستانے لگے

शायर: Yasir Abbas5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हसीं ख़याल जो पैहम उन्हें सताने लगे
वो बे-ख़ुदी से मिरी शाइरी सुनाने लगे

बड़े ग़ुरूर से कहते थे याद आती नहीं
गए जो हिज्र की वादी तो गिड़गिड़ाने लगे

दिया पयाम भी क़ासिद को बे-क़रारी में
लिया था नाम कि दो होंट कपकपाने लगे

हमारा ज़िक्र गवारा न था कभी जिन को
हमारी बात पे हौले से मुस्कुराने लगे

मुझे सुख़न भी लगा ऐन अपना इल्हामी
मिरी ग़ज़ल जो वो महफ़िल में गुनगुनाने लगे