उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har qadam KHauf hai dahshat hai riya-kari hai

हर क़दम ख़ौफ़ है दहशत है रिया-कारी है

ہر قدم خوف ہے دہشت ہے ریاکاری ہے

शायर: Faiyaz Rashk6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर क़दम ख़ौफ़ है दहशत है रिया-कारी है
रौशनी में भी अँधेरों का सफ़र जारी है

ताक़त-ए-कुफ़्र ने कोहराम मचा रख्खा है
जाने किस किस को मिटाने की ये तय्यारी है

मिल के सब क़हर बपा करते हैं इंसानों पर
है जुनूँ ज़ेहन में और आँख में चिंगारी है

अपने अंदाज़ से एक साथ यहाँ पर रहना
ये हमारी ही नहीं तेरी भी लाचारी है

हम ने हर 'अह्द में रख्खा है भरम तेरा जब
तू ही ऐ वक़्त बता क्या ये वफ़ादारी है

उस को दुनिया में कोई आँख दिखा सकता है क्या
'रश्क' जिस क़ौम में एहसास है बेदारी है