उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har kaam ka waqt muqarrar hai har kaam ko waqt pe hona hai

हर काम का वक़्त मुक़र्रर है हर काम को वक़्त पे होना है

ہر کام کا وقت مقرر ہے ہر کام کو وقت پہ ہونا ہے

शायर: Aakif Ghani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर काम का वक़्त मुक़र्रर है हर काम को वक़्त पे होना है
किस बात की आख़िर जल्दी है किस बात का फिर ये रोना है

दुनिया के मसाइब झेलने को मालिक ने बनाया है जीवन
आराम भला फिर काहे का फिर काहे ये सोना है

बे-मक़्सद जीना कहते हैं हैवान के जैसा जीने को
इंसाँ के लिए तो ये जीवन यारो पुर-ख़ार बिछौना है

दुश्वार सही रस्ता लेकिन चलना है हमें मंज़िल की तरफ़
मंज़िल की तलब में 'आकिफ़' जी कुछ पाना है कुछ खोना है