उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har chand ki ghaalib ke taraf-dar bahut hain

हर चंद कि ग़ालिब के तरफ़-दार बहुत हैं

ہر چند کہ غالب کے طرف دار بہت ہیں

शायर: Qadir Khan Sartaj5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर चंद कि ग़ालिब के तरफ़-दार बहुत हैं
लेकिन ये मिरे दोस्त पुर-असरार बहुत हैं

जमती हुई देखी है हथेली पे भी सरसों
ये लोग ज़माने के तो फ़नकार बहुत हैं

शर्मिंदा-ए-एहसास न हो गर्दिश-ए-दौराँ
बर्बादी-ए-जाँ को तो मिरे यार बहुत हैं

ये अक़्ल कहे राह-ए-मुलाक़ात नहीं है
दिल हम से कहे इस बरस आसार बहुत हैं

कुछ उन के लिए हाथ उठा और दुआ कर
‘सरताज’ तिरे इन दिनों बीमार बहुत हैं