उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haman hain ishq mastana haman ko hoshiyari kya

हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या

ہمن ہیں عشق مستانہ ہمن کو ہوشیاری کیا

शायर: Kabeer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या
रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या

जो बिछड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते
हमारा यार है हम में हमन को इंतिज़ारी क्या

ख़लक़ सब नाम अपने को बहुत कर सर पटकता है
हमन गर नाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या

न पल बिछ्ड़ें पिया हम से न हम बिछड़े पियारे से
उन्हीं से नेह लागी है हमन को बे-क़रारी क्या

'कबीरा' इश्क़ का माता दुई को दूर कर दिल से
जो चलना राह नाज़ुक है हमन सर बोझ भारी क्या