उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum yahan gham se hain do-chaar kahin aur chalen

हम यहाँ ग़म से हैं दो-चार कहीं और चलें

ہم یہاں غم سے ہیں دو چار کہیں اور چلیں

शायर: Kalicharan Singh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम यहाँ ग़म से हैं दो-चार कहीं और चलें
आप भी दिखते हैं बीमार कहीं और चलें

जान पहचान के जो चेहरे थे अंजान हुए
हम रखें किस से सरोकार कहीं और चलें

जिस बयाबान में मिलते थे कभी शाम-ओ-सहर
सज गया है वहाँ बाज़ार कहीं और चलें

कैसे कमरे में हवा आए दरीचा भी नहीं
साँस लेना हुआ दुश्वार कहीं और चलें

हादिसा अपने मोहल्ले में हुआ है तो क्या
पढ़ के देखेंगे कल अख़बार कहीं और चलें