उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum tere shahr mein aae tere mehman bhi rahe

हम तिरे शहर में आए तिरे मेहमाँ भी रहे

ہم ترے شہر میں آئے ترے مہماں بھی رہے

शायर: Jagdeesh Masoom7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम तिरे शहर में आए तिरे मेहमाँ भी रहे
तुझ को चाहा भी मगर तुझ से गुरेज़ाँ भी रहे

अब कहीं दूर हैं हम तेरे ख़यालों से मगर
हम तिरे शौक़ की रूदाद के 'उनवाँ भी रहे

फिर तिरे प्यार की वो सा’अत-ए-रंगीं न मिली
गर्दिश-ए-वक़्त से हम दस्त-ओ-गरेबाँ भी रहे

रात-भर कोई ख़लिश दिल को सताती ही रही
बंद आँखों में कई ख़्वाब परेशाँ भी रहे

बारहा दिल को हुआ तर्क-ए-त'अल्लुक़ का जुनूँ
और फिर तुझ से मुलाक़ात के अरमाँ भी रहे

न गई दिल की ये आशुफ़्ता-मिज़ाजी न गई
हम सुलैमाँ भी हुए बे-सर-ओ-सामाँ भी रहे

लुट गईं जिन के सबब दिल की बहारें 'मा’सूम'
गुलशन-ए-दिल के वही लोग निगहबाँ भी रहे