उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum chehra-e-zunnar ko puja nahin karte

हम चेहरा-ए-ज़ुन्नार को पूजा नहीं करते

ہم چہرۂ زنار کو پوجا نہیں کرتے

शायर: M. S. Rahi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम चेहरा-ए-ज़ुन्नार को पूजा नहीं करते
या'नी दिल-ए-ख़ुद्दार को रुस्वा नहीं करते

हम दामन-ए-पिंदार को मैला नहीं करते
अज्दाद के किरदार को बेचा नहीं करते

ऐ अहल-ए-वतन आप से इतनी है गुज़ारिश
सींचे हुए गुलज़ार को रौंदा नहीं करते

कश्ती को किनारे पे ले आना ही बहुत है
गिर्दाब-ए-ज़रर-बार को रोका नहीं करते

तख़रीब ही ता'मीर की बुनियाद है यारो
उजड़े हुए घर-बार को रोया नहीं करते

गुलज़ार के फूलों की हिफ़ाज़त है इबादत
'राही' तो कभी ख़ार को सींचा नहीं करते