उर्दू शायरी · ग़ज़ल

habib-e-mah-e-kanani ke sadqe

हबीब-ए-माह-ए-कनआनी के सदक़े

حبیب ماہ کنعانی کے صدقے

शायर: Qais Kakorvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हबीब-ए-माह-ए-कनआनी के सदक़े
मैं अपने यूसुफ़-ए-सानी के सदक़े

जबीं मेरी तरह दाग़-ए-ग़ुलामी
मैं इस नक़्श-ए-सुलैमानी के सदक़े

है आईना तिरी सूरत पे हैराँ
मैं आईने की हैरानी के सदक़े

सरापा बंदगी है किबरियाई
मैं इस तकमील-ए-इंसानी के सदक़े