उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar banate waqt is ka dhyan hona chahiye

घर बनाते वक़्त इस का ध्यान होना चाहिए

گھر بناتے وقت اس کا دھیان ہونا چاہئے

शायर: Faheem Jogapuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर बनाते वक़्त इस का ध्यान होना चाहिए
धूप रखने के लिए दालान होना चाहिए

तंग गलियों की तरह हरगिज़ न रस्म-ओ-राह हो
दोस्ती में दिल खुला मैदान होना चाहिए

ख़ूबसूरत गुफ़्तुगू क्या इस्तिआरों के बग़ैर
इस सहीफ़े के लिए जुज़दान होना चाहिए

हो सके ताज़ा हवा का महबस-ए-जाँ में गुज़र
दिल की दीवारों में रौशन-दान होना चाहिए

सिर्फ़ गुल-पोशी नहीं है मेहमानी की दलील
मेज़बाँ की आँख में गुल-दान होना चाहिए

साहिब-ए-फ़हम-ओ-दरक होने पे भी औलाद को
बाप-माँ के सामने नादान होना चाहिए

चंद लम्हों को ठहरना है यहाँ जबकि 'फहीम'
कम बहुत ही कम सर-ओ-सामान होना चाहिए