उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-e-muztar ko ruswa kyon karen hum

दिल-ए-मुज़्तर को रुस्वा क्यों करें हम

دل مضطر کو رسوا کیوں کریں ہم

शायर: M Nadeem Qazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ए-मुज़्तर को रुस्वा क्यों करें हम
तुम्हारे साथ झगड़ा क्यों करें हम

अना को तुम भी अब अपनी सँभालो
अब इस का भी तमाशा क्यों करें हम

वो रोया था बहुत हम से बिछड़ कर
सुबूत अब उस से माँगा क्यों करें हम

जो हम को ज़ख़्म दे कर के गए हैं
भला अब उन का पीछा क्यों करें हम

बग़ावत ख़ून में अपने है साक़ी
तो फिर सज्दे को ज़ाए' क्यों करें हम

गुनह अब हम से जो भी हो गया है
तो नाहक़ उस से पर्दा क्यों करें हम

बहुत उक्ता गए इन सिलसिलों से
मोहब्बत अब दुबारा क्यों करें हम