उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dikha raha hai anguTha falak se tara mujhe

दिखा रहा है अँगूठा फ़लक से तारा मुझे

دکھا رہا ہے انگوٹھا فلک سے تارا مجھے

शायर: Aanand Akhtar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिखा रहा है अँगूठा फ़लक से तारा मुझे
धकेल दे न बुलंदी से फिर दोबारा मुझे

मिरे सिवा भी कोई क़ैद है ख़राबे में
अजीब तौर से वो रात-भर पुकारा मुझे

मिरे ख़िलाफ़ खड़ा हो गया है कौन आख़िर
जो रूप धार के मेरा ही तीर मारा मुझे

किया जब उस ने तह-ए-आब मेरी कश्ती को
समझ में बात नहीं आई क्यों उभारा मुझे

अभी समेट रहा हूँ मैं धज्जियाँ अपनी
न जाओ छोड़ के ऐसे में बे-सहारा मुझे