उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhti hai nigah pani mein

देखती है निगाह पानी में

دیکھتی ہے نگاہ پانی میں

शायर: Faheem Jogapuri11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखती है निगाह पानी में
तख़्त-ए-आलम-पनाह पानी में

हम से सैलाब का मज़ा पूछो
हम हुए हैं तबाह पानी में

क्या समझते हैं आप गंगा-जल
धुल गए क्या गुनाह पानी में

मैं सुनाता हूँ पत्थरों को ग़ज़ल
और होती है वाह पानी में

कश्ती-ए-दिल को अब पनाह कहाँ
लहर है बे-पनाह पानी में

वो मिरी मम्लिकत में आ ही गए
मैं हुआ बादशाह पानी में

मौज है या अदा हसीनों की
गाह साहिल पे गाह पानी में

आ ही जाएगा राह पर दरिया
तुम निकालो तो राह पानी में

तू भी तिश्ना है और मैं भी हूँ
ख़ूब होगी निबाह पानी में

तेरी आराम-गाह साहिल पर
मेरी आराम-गाह पानी में

तू बता क्यों 'फहीम' डूब गया
तू रहा है गवाह पानी में