उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard ki dhup-bhare dil ki tamazat le kar

दर्द की धूप-भरे दिल की तमाज़त ले कर

درد کی دھوپ بھرے دل کی تمازت لے کر

शायर: Zafar Imam6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द की धूप-भरे दिल की तमाज़त ले कर
कैसे जाए कोई एहसास की हिजरत ले कर

फिर कहाँ जाइए अब बैठिए मातम कीजे
दिल के हाथों में ये अनमोल शराफ़त ले कर

क्या कहें अब तो निकलना भी बहुत मुश्किल है
अपने काँधे पे ख़ुद अपनी ही ज़मानत ले कर

पेट की भूक तमाशे पे तमाशा कर ले
हम थकेंंगे नहीं इस भूक की आदत ले कर

अपने बिस्तर पे किसी रात हमें नींद आती
और फिर ख़्वाब नहीं आते ज़रूरत ले कर

देखिए सोचिए महसूस तो होने दीजे
दर्द की धूप में एहसास की लज़्ज़त ले कर