उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Dar ki maTki phoDo pagal

डर की मटकी फोड़ो पागल

ڈر کی مٹکی پھوڑو پاگل

शायर: Faiyaz Dilbar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

डर की मटकी फोड़ो पागल
दामन और निचोड़ो पागल

दीवाना हूँ इसी लिए तुम
मुझ से रिश्ता जोड़ो पागल

जम जाओगे इस सर्दी में
अब तो मुझ को ओढ़ो पागल

मेरी साँसें रुक जाएँगी
अंगड़ाई को तोड़ो पागल

रिश्ता तोड़ चुके हो मुझ से
हाथ मिरा तो छोड़ो पागल