उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barishon mein ghusl karte sabz peD

बारिशों में ग़ुस्ल करते सब्ज़ पेड़

بارشوں میں غسل کرتے سبز پیڑ

शायर: Balraj Komal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बारिशों में ग़ुस्ल करते सब्ज़ पेड़
धूप में बनते सँवरते सब्ज़ पेड़

किस क़दर तश्हीर-ए-ग़म से दूर था
चुपके चुपके आह भरते सब्ज़ पेड़

दूर तक रोती हुई ख़ामोशियाँ
रात के मंज़र से डरते सब्ज़ पेड़

दश्त में वो राह-रौ का ख़्वाब थे
घर में कैसे पाँव धरते सब्ज़ पेड़

दोस्तों की सल्तनत में दूर तक
दुश्मनों के ढोर चरते सब्ज़ पेड़

कर गए बे-मेहर मौसम के सुपुर्द
रफ़्ता रफ़्ता आज मरते सब्ज़ पेड़