उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni KHuddari to pamal nahin kar sakte

अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते

اپنی خودداری تو پامال نہیں کر سکتے

शायर: Nadir Areez7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते
उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते

सीम जाएगा तो फिर नक़्श उभारेंगे कोई
काम दीवार पे फ़िलहाल नहीं कर सकते

रह भी सकता है तिरा नाम कहीं लिक्खा हुआ
सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते

दोस्त तस्वीर बहुत दूर से खींची गई है
हम उजागर ये ख़द-ओ-ख़ाल नहीं कर सकते

रोती आँखों पे मियाँ हाथ तो रख सकते हैं
पेश अगर आप को रूमाल नहीं कर सकते

दे न दे काम की उजरत ये है मर्ज़ी उस की
पेशा-ए-इश्क़ में हड़ताल नहीं कर सकते

दश्त आए जिसे वहशत की तलब हो 'नादिर'
ये ग़िज़ा शहर हम इर्साल नहीं कर सकते