उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh se kis ne raushni mangi

आँख से किस ने रौशनी माँगी

آنکھ سے کس نے روشنی مانگی

शायर: Tabinda Masood5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख से किस ने रौशनी माँगी
ख़्वाब के नाम ज़िंदगी माँगी

मैं ने लहरा के अपने आँचल को
तेरे सपनों की चाँदनी माँगी

ज़िंदगी बाँटने जो आई सुख़न
मैं ने लफ़्ज़ों में ताज़गी माँगी

कब ये चाहा कि दश्त हो आगे
कब समुंदर से बे-रुख़ी माँगी

यूँ भी सज्दों में गिर गई अक्सर
यूँ भी 'ताबिंदा' बंदगी माँगी