उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aa gai fasl-e-nau-bahaar dasht mein wo hawa chali

आ गई फ़स्ल-ए-नौ-बहार दश्त में वो हवा चली

آ گئی فصل نو بہار دشت میں وہ ہوا چلی

शायर: Qadr Bilgrami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आ गई फ़स्ल-ए-नौ-बहार दश्त में वो हवा चली
सर पे हुआ जुनूँ सवार अक़्ल पियादा-पा चली

बाग़ से जब हवा चली मय-कदे से घटा चली
दिल की कली खिला चली दिल की लगी बुझा चली

तू ने न आ के दीद की बैठ के घर में ईद की
लाश तिरे शहीद की जानिब-ए-कर्बला चली

वाह रे दौरा-ए-शराब ख़ान-क़हें हुईं ख़राब
झूम रहे हैं शैख़-ओ-शाब अब की अजब हवा चली

शोर उठा जो आह का सब्र-ओ-क़रार उड़ चला
क़ाफ़िले में बजा दिरा होने लगी चला-चली

साक़ी-ओ-रिन्द-ए-बादा-कश और पुकारें अल-अतश
आते हैं सब को ग़श पे ग़श आज शराब क्या चली

'क़द्र' ये फ़ौज जब चढ़ी टूटेगी क़ल्ब की घड़ी
नाज़ बढ़ा अदा बढ़ी ग़म्ज़ा चला हया चली