उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mauj-e-KHun sar se guzarti hai guzar jaane do

मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़रती है गुज़र जाने दो

موج خوں سر سے گزرتی ہے گزر جانے دو

शायर: Tabassum Rizvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़रती है गुज़र जाने दो
कहीं ये गर्दिश-ए-अय्याम ठहर जाने दो

उठने वाली है कोई दम में सितारों की बिसात
और कुछ देर का नश्शा है उतर जाने दो

राह में रोक के अहवाल न पूछो हम से
अभी बाक़ी है बहुत अपना सफ़र जाने दो

अभी हंगाम नहीं राह में दम लेने का
अभी ये क़ाफ़िला-ए-अहल-ए-नज़र जाने दो

लब पे आ आ के रही जाती हैं कितनी बातें
हमें कहना तो बहुत कुछ है मगर जाने दो